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आधुनिक युग में भी महाकुंभ जैसा आयोजन लोगों की आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है: श्री श्री रविशंकर

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अपडेटेड 03 फ़रवरी 2025, 10:27 PM IST
आधुनिक युग में भी महाकुंभ जैसा आयोजन लोगों की आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है: श्री श्री रविशंकर
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बीएनटी न्यूज़

प्रयागराज। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर अपने प्राइवेट जेट से विभिन्न देशों के 10-12 शिष्यों के साथ महाकुंभ में आए हुए हैं। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने सोमवार को बीएनटी न्यूज़ से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उनका चौथा महाकुंभ है। पिछले तीन महाकुंभों की तुलना में इस बार की व्यवस्था अद्भुत है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि भारत का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ रहा है और सनातन संस्कृति अपनी पुरातन तथा नवीनता के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। आधुनिक युग में भी महाकुंभ जैसा आयोजन लोगों की आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है।

उन्होंने कुंभ में स्नान को लेकर कहा कि जब श्रद्धा होती है, तो सवाल नहीं उठता, लोग यहां आकर स्नान करते हैं और आत्मिक संतोष प्राप्त करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने महाकुंभ की व्यवस्था को बहुत अच्छे से संभाला है। हालांकि, उन्होंने महाकुंभ में हुए हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे जहां भी हों, वहीं स्नान करें। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, 15 किलोमीटर का संपूर्ण क्षेत्र संगम का पवित्र क्षेत्र माना जाता है।

श्री श्री रविशंकर ने विरोध करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि आलोचना करने वालों का काम ही आलोचना करना होता है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रशासन ने स्थिति को अच्छे से संभाला है और सभी को सतर्कता से काम करना चाहिए। उन्होंने महाकुंभ को केवल नदियों का संगम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं और दिलों के मिलन का प्रतीक बताया।

उन्होंने अपनी महाकुंभ यात्रा के अनुभव शेयर करते हुए कहा कि एक समय था जब वह खुद संगम में स्नान करने से संकोच करते थे, क्योंकि कानपुर की टेनरियों की गंदगी सीधे संगम में आ जाती थी। लेकिन इस बार स्थिति पहले से काफी बेहतर है और पानी अधिक स्वच्छ दिख रहा है। व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक अच्छी हुई है, लेकिन इसे और भी स्वच्छ बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सामूहिक रूप से प्रयास करें और अधिक जागरूक बनें।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालु संगम में वस्त्र और चुनरी डालने से बचें और केवल पुष्प अर्पित करें। उन्होंने यह भी कहा कि विरोधियों की बातों से कोई प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि प्रतिपक्ष का काम ही विरोध करना होता है। महाकुंभ को लेकर बहस और विवाद हमेशा चलते आए हैं और यह भी एक परंपरा बन चुकी है।

श्री श्री रविशंकर ने अंत में श्रद्धालुओं से अपील की कि वे आराम से आएं, शांति से कुंभ में शामिल हों और आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लें। अभी महाकुंभ के कई दिन बाकी हैं और इस भव्य आयोजन को सभी को मिलकर सफल बनाना चाहिए।

बता दें कि आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर शनिवार को महाकुंभ पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। वह अपने प्राइवेट जेट से विभिन्न देशों के 10-12 शिष्यों के साथ महाकुंभ में आए। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें शॉल व फलों की टोकरी भेंट की।

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