BNT Logo | Breaking News Today Logo

Latest Hindi News

  •   शुक्रवार, 04 अप्रैल 2025 01:35 AM
  • 25.09°C नई दिल्ली, भारत

    Breaking News

    ख़ास खबरें
     
  1. दिलों और परंपराओं को जोड़ती है रामायण : बैंकॉक में ‘रामकियेन’ देखने के बाद पीएम मोदी
  2. ट्रंप की ‘टैरिफ घोषणा’ ने दुनिया को दी टेंशन : 5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला?
  3. राज्यसभा में ‘वक्फ संशोधन विधेयक’ पेश, ‘धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं’: किरेन रिजिजू
  4. मेरे खिलाफ झूठ बोला गया, मजदूर का बेटा हूं, डरूंगा झुकूंगा नहीं : खड़गे
  5. संसद में वक्फ विधेयक को जबरन पारित किया गया, यह संविधान पर सीधा हमला है : सोनिया गांधी
  6. आईपीएल 2025: गुजरात टाइटंस ने आरसीबी को आठ विकेट से हराया
  7. वक्फ संशोधन विधेयक को खड़गे, केसी वेणुगोपाल ने बताया ‘असंवैधानिक’
  8. वक्फ बिल: कानून सबको स्वीकार करना पड़ेगा- अमित शाह
  9. लालू यादव की तबीयत बिगड़ी, इलाज के लिए जाएंगे दिल्ली
  10. वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर अमित शाह ने वक्फ बोर्ड द्वारा जब्त संपत्तियों को गिनवाया, विपक्ष पर लगाए आरोप
  11. ‘इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल’ पर लगी संसद की मुहर
  12. देश धर्मशाला नहीं तो जेल भी नहीं है : संजय राउत
  13. वक्फ बिल संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण : गौरव गोगोई
  14. वक्फ के तहत गरीबों की भलाई के नहीं हुए काम, विपक्ष मुसलमानों को कितना करेगा गुमराह : किरेन रिजिजू
  15. लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश, किरेन रिजिजू ने कहा, ‘संसद की बिल्डिंग को भी किया गया था क्लेम’

सोमवार को पेश नहीं होगा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल

bntonline.in Feedback
अपडेटेड 15 दिसंबर 2024, 1:53 PM IST
सोमवार को पेश नहीं होगा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल
Read Time:3 Minute, 38 Second

बीएनटी न्यूज़

नई दिल्ली। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का बिल सोमवार को लोकसभा में पेश नहीं होगा। लोकसभा की संशोधित तालिका में भी यह बिल सूचीबद्ध नहीं है।

इस बिल की कॉपी लोकसभा के सभी सांसदों को भेज दी गई है, ताकि वो इसका अध्ययन कर सकें।

20 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र है। अगर सोमवार को इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया, तो ऐसी स्थिति में महज इसे पेश करने के लिए चार दिन शेष रह जाएंगे।

12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने दो ड्रॉफ्ट कानूनों को मंजूरी दी थी। जिसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक विधानसभाओं वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ चुनाव कराने के संबंध में हैं।

वहीं, वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कोई इसका समर्थन कर रहा है, तो कोई इसका विरोध कर रहा है।

भाजपा नेता और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में वन नेशन वन इलेक्शन की पैरोकारी की थी।

उन्होंने कहा था, “एक देश, एक चुनाव’ देश के हित में है। इससे विकास में कोई रुकावट नहीं आती। खर्चों में कटौती होगी और पैसे की बचत होगी। अगर हम 1967 तक देखें, तो देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ ही हो रहा था और उस समय संघीय संरचना पर कोई आंच नहीं आई थी। यह कहना कि संघीय संरचना पर चोट पड़ रही है, गलत है। वास्तव में, यह देश को और मजबूत बनाएगा और विकास को गति देगा। अगर कहीं कुछ बदलाव होंगे, तो वह कानून के अनुसार होंगे और लोग उस पर अपनी राय देंगे।”

वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हुसैन दलवई ने आईएएनएस से बातचीत में कहा था, “यह नुकसानदेह होगा, क्योंकि हमारे देश में संघीय ढांचा है। ऐतिहासिक रूप से भारत कभी भी एक इकाई के रूप में एकीकृत नहीं था। यह ब्रिटिश काल के दौरान और महात्मा गांधी के आंदोलन के प्रयासों के माध्यम से एक साथ आया, इसे याद रखना चाहिए। हर क्षेत्र की भाषा और संस्कृति अलग-अलग है। केंद्र के दिमाग में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का मतलब एक पार्टी का रूल है। केंद्र सरकार यहां पर एक पार्टी का रूल लाना चाहती है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि वह यह नहीं ला पाएंगे। संविधान में उसका कोई स्थान नहीं है। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ लोग नहीं मानेंगे।”

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *