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एसडीआरएफ की टीम ने उत्तराखंड में ऋषिगंगा नदी का सर्वेक्षण किया

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अपडेटेड 14 फ़रवरी 2021, 2:28 PM IST
एसडीआरएफ की टीम ने उत्तराखंड में ऋषिगंगा नदी का सर्वेक्षण किया
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एसडीआरएफ की टीम ने उत्तराखंड में ऋषिगंगा नदी का सर्वेक्षण किया

देहरादून, 14 फरवरी (बीएनटी न्यूज़)| उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से आए सैलाब के बाद अलर्ट जारी किए जाने के बीच राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) की आठ सदस्यीय टीम ने अशांत ऋषिगंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में एक झील का सर्वेक्षण किया। उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को ग्लेशियर टूटने की वजह से ऋषिगंगा नदीं का जलस्तर काफी बढ़ गया था, जिसके बाद आए सैलाब ने काफी कहर बरपाया।

एसडीआरएफ कमांडेंट नवनीत भुल्लर की अगुवाई वाली टीम इलाके के वीडियो फिल्माने के अलावा झील से नमूने एकत्र करने के बाद शनिवार शाम चमोली जिले के रैणी गांव लौटी।

भुल्लर ने कहा, “हम इन नमूनों और वीडियो को आगे की कार्रवाई के लिए देहरादून के पुलिस मुख्यालय भेजेंगे।”

एसडीआरएफ की टीम, जिसने शुक्रवार सुबह झील के लिए अपनी ट्रैकिंग शुरू की थी, उसे वहां तक पहुंचने में लगभग 13 से 14 घंटे लगे, जहां उन्होंने शुक्रवार शाम को एक अस्थायी शिविर स्थापित किया।

भुल्लर ने कहा कि झील से रिसाव हो रहा है। हालांकि, उन्होंने रिसाव के मुद्दे पर आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह वैज्ञानिकों पर निर्भर है कि वे इसका ध्यान रखें।

भुल्लर ने कहा, “हमने झील के लिए एक उचित मार्ग भी ढूंढ लिया है, जो भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में मदद कर सकता है।”

कुछ ग्रामीणों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं के बाद, उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को ऋषिगंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में एक झील के निर्माण के लिए उपग्रह (सैटेलाइट) तस्वीरों को देखे जाने के बाद चेतावनी जारी की थी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा, क्योंकि सैटेलाइट तस्वीरें में ऋषिगंगा नदीं में 400 मीटर झील के निर्माण का पता चला है।”

शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने कहा कि लोगों को ऋषिगंगा नदी के पास नहीं जाने और सभी सावधानियां बरतने को कहा गया है।

सरकार ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों से भी कहा था कि वे झील निर्माण पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए टीमों को ऋषिगंगा नदी के पास भेज दें।

ऋषिगंगा धौलीगंगा नदी की एक सहायक नदी है, जिस पर तपोवन परियोजना का काम चल रहा है।

सैलाब की वजह से चमोली जिले में दो जलविद्युत परियोजनाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। जलप्रलय के बाद से इलाके के 200 से अधिक व्यक्ति लापता हैं।

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