
बीएनटी न्यूज़
रांची। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट से झारखंड में स्वास्थ्य की आधारभूत संरचनाओं और सेवाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है। झारखंड की महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष 2016 से 2022 के बीच राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और संरचनाओं पर की गई ऑडिट की विस्तृत जानकारी दी।
रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कोविड प्रबंधन पर केंद्र और राज्य के बजट से कुल प्रावधानिक राशि का 32 फीसदी ही उपयोग किया जा सका।
बताया गया कि झारखंड ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन सोसायटी को कोविड प्रबंधन के लिए 436.97 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन 2019-20 से 2021-22 के बीच सिर्फ 137.65 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके, यानी कुल राशि का मात्र 32 प्रतिशत ही उपयोग किया गया। भारत सरकार ने 483.54 करोड़ रुपये जारी किए थे। राज्य सरकार को 272.88 करोड़ रुपये देने थे, जिससे कुल 756.42 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ। लेकिन, झारखंड सरकार ने केंद्र की 291.87 करोड़ और राज्य की 145.10 करोड़ राशि जारी की, जिससे कुल 436.97 करोड़ रुपये का ही उपयोग हुआ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि फंड का सही इस्तेमाल नहीं होने से कोविड-19 प्रबंधन प्रभावित हुआ। कई महत्वपूर्ण सुविधाएं समय पर नहीं बन सकीं, जैसे- जिलास्तर पर आरटी-पीसीआर लैब नहीं बनी। रांची में शिशु चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित नहीं हो सका। सीएचसी, पीएचसी और एचएससी में पूर्वनिर्मित संरचनाओं का निर्माण अधूरा रहा। तरल चिकित्सा ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना नहीं हो पाई।
रिपोर्ट में कोविड काल के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन के वितरण एवं प्रबंधन में भारी गड़बड़ी उजागर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड के दौरान रांची के नामकुम स्थित सेंट्रल वेयरहाउस में रेमडेसिविर की 1 लाख 64 हजार 761 शीशियां उपलब्ध थीं। इनमें से 1 लाख 11 हजार 556 शीशियां राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों को भेजी गई थीं। ऑडिट में यह सच सामने आया कि जिला अस्पतालों को बिना असेसमेंट इंजेक्शन की सप्लाई की गई थी। कई अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा तो कहीं कम भेजी गई थी। धनबाद, दुमका, गढ़वा, गुमला, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा जिले को रेमडेसिविर की 15,514 शीशियां भेजी गई थीं।
जांच में पता चला कि इनमें से सिर्फ 6,782 शीशियां स्वास्थ्य केंद्रों में बांटी गई, जबकि 5,256 शीशियां एक्सपायर कर गई। वहीं, 3,376 शीशियां कोविड खत्म होने के बाद भी गोदाम में पड़ी हुई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल वेयरहाउस के रजिस्टर में दर्ज किया गया कि 6,990 इंजेक्शन की आपूर्ति रांची के ड्रग कंट्रोलर को की गई थी, जबकि डिलीवरी चालान से यह पता चलता है कि इनमें से 2,040 इंजेक्शन रांची के मेसर्स मेडी सेल्स इंडिया और 4,950 इंजेक्शन मेसर्स हरिहर मेडिकल एजेंसी को जारी किए गए थे। राज्य में स्वास्थ्य संरचनाओं का हाल क्या है, इसका पता भी इस रिपोर्ट से चलता है।
मार्च 2022 तक राज्य में चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों के 3,634 स्वीकृत पदों के मुकाबले 2,210 पद रिक्त थे, जो कुल क्षमता का लगभग 61 प्रतिशत है। इसके अलावा स्टाफ नर्सों के 5,872 स्वीकृत पदों के मुकाबले 3,033 पद तथा पैरामेडिक्स के 1,080 स्वीकृत पदों के मुकाबले 864 पद रिक्त हैं।
महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने बताया कि हमने ऑडिट के दौरान राज्य में एक भी ऐसा अस्पताल नहीं पाया, जहां सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ उपलब्ध हों।